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परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण सुझाव (कक्षा-9 और कक्षा-10)

Somak Chatterjee | March 2nd, 2013 at 12:39pm

नमस्कार मित्रों!

यह श्रृंखला अपठित गद्यांश एवं अपठित पद्यांश पर आधारित है।

. अपठित गद्यांश एवं अपठित पद्यांश- यह भाग 20 अंकों का होता है। इसके अंदर अपठित गद्यांश के दस अंक और अपठित पद्यांश के दस अंक निर्धारित होते हैं। अपठित गद्यांश में पाँच-पाँच अंकों के दो गद्यांश पूछे जाएँगे और यही स्थिति पद्यांश की भी होगी। अंक अर्जित करने का यह सबसे अच्छा भाग है। यह भाग पाठ्य-पुस्तक पर आधारित नहीं होता है। यह सदैव पाठ्य-पुस्तक के बाहर से लिया जाता है। अतः इसके लिए विद्यार्थी को अपनी सजगता, व्याकरण ज्ञान तथा अपनी बौद्धिक क्षमता के आधार पर उत्तर देना पड़ता है।
अब प्रश्न उठता है कि इसकी तैयारी परीक्षा से पहले कैसे की जाए? आप इसकी तैयारी इस प्रकार से कर सकते हैं-

. इसके लिए आप किसी भी हिंदी की कहानी, निबंध, कविता आदि की पुस्तक को लीजिए और उसे पढ़ें।
. उसके छोटे-छोटे से भागों पर स्वयं विचार-विमर्श कीजिए। उसकी सहायता से प्रश्न बनाने का प्रयास कीजिए।
. उनमें कुछ शब्दों का चयन कीजिए और उनके विलोम शब्द, पर्यायवाची, शब्द, प्रत्यय, उपसर्ग, समास इत्यादि देने का प्रयास कीजिए।
. जहाँ कठिनाई आए, वहाँ बड़ों की सहायता अवश्य लीजिए।
. गद्यांश या पद्यांश काव्यांश के भागों में यह समझने का प्रयास कीजिए कि लेखक या कवि क्या कहना चाहता है।

गद्यांश से संबंधी आवश्यक बातें। यह आप जानते हैं कि इसमें बहुविकल्पीय प्रश्न होते हैं। प्रत्येक प्रश्न का एक अंक निर्धारित होता है। इसमें व्याकरण से संबंधित, विषय वस्तु पर आधारित, शीर्षक चयन से संबंधित प्रश्न आते हैं।

उदाहरण के लिए देखिए-

हम मनुष्यों का कुछ कुछ बनने का स्वप्न होता है। हम अपने स्वप्न को साकार रुप प्रदान करने के लिए उसे अपना आधार और लक्ष्य बना लेते हैं। अपने सपने के आधार पर अपने भविष्य की नींव रखना आरम्भ करते हैं। हमारा लक्ष्य कुछ भी हो सकता है। हम चिकित्सक, इंजीनियर, राजनेता, अभिनेता, सरकारी कर्मचारी, अध्यापक कुछ भी बनने की सोच सकते हैं। हमारी शिक्षा का स्तर भी लक्ष्य के आधार पर बढ़ने लगता है। शिक्षा एक ऐसा माध्यम है, जो लक्ष्य तक पहुँचने का मार्ग है। शिक्षा ही लक्ष्य तक पहुँचाकर सपने को साकार करती है। यह मनुष्य के जीवन में बहुमूल्य रत्न के समान है, जो किसी के द्वारा चुराया मिटाया नहीं जा सकता है। यक्ष द्वारा पूछे गए प्रश्न कि विदेश में मनुष्य का साथी कौन होता है? युधिष्ठिर द्वारा इसका उत्तर दिया गयाविद्या महाभारत में युधिष्ठिर और यक्ष के इस संवाद से स्पष्ट हो जाता है कि शिक्षा प्राचीनकाल से मनुष्य के जीवन में महत्वपूर्ण रही है।

प्रश्न-1 गद्यांश को पढ़कर बताइए कि मनुष्य का आधार लक्ष्य क्या होता है? 1 अंक

() धन कमाना और सफल बनना
(
) स्वयं के सपने को साकार करना
() घर बसाना और जीवन में सुख-सुविधाओं का भोग करना
(
) मनचाही नौकरी पाना

उत्तर- स्वयं के सपने को पूरा करना।

प्रश्न-2 गद्यांश के आधार पर बताओ कि लक्ष्य तक पहुँचने के लिए मनुष्य को किस प्रकार के मार्ग पर चलना चाहिए? 1 अंक

() धन के मार्ग पर
(
) अनीति के मार्ग पर
(
) शिक्षा के मार्ग पर
(
) अध्यापक के बताए मार्ग पर

उत्तर- शिक्षा के मार्ग पर

प्रश्न-3 अपनी बात की प्रमाणिकता को सिद्ध करने के लिए लेखक क्या उदाहरण प्रस्तुत करता है? 1 अंक
(
) शिक्षा के सबल पक्ष का

() महाभारत में यक्ष और युधिष्ठिर के संवाद का
(
) सपनों का
(
) भावी भविष्य का

उत्तर- अपनी बात की प्रमाणिकता को सिद्ध करने के लिए लेखक महाभारत में यक्ष और युधिष्ठिर के संवाद को देता है।

प्रश्न-4 राजनेता में कौन-सा समास है? 1 अंक

() तत्पुरुष समास
(
) द्वंद्व समास
(
) बहुव्रीहि समास
(
) अव्ययीभाव समास

उत्तर- राजनेता में तत्पुरुष समास है।

प्रश्न-5 प्रस्तुत गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक है: 1 अंक

() शिक्षा का महत्व
(
) श्रम का महत्व
(
) स्वप्न का महत्व
(
) लक्ष्य का महत्व

उत्तर- शिक्षा का महत्व

अपठित गद्यांश पहले नहीं पढ़ा गया होता है। अतः इसके प्रश्नों के उत्तर देने के लिए सूझ-बूझ का होना आवश्यक है। कुछ बातें हैं, जिस पर अमल करके आप इस भाग में पूरे अंक सरलता के साथ अर्जित कर सकते हैं-

1. सबसे पहले अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक और शांत मन से पढ़िए।
2.
पूछे गए प्रश्नों के उत्तर को आप पेन या पेंसिल की सहायता से रेखांकित करिए।
3.
अब उन रेखांकित उत्तरों को दिए गए प्रश्नों के विकल्पों से मिलाइए और सही उत्तर चुनकर लिख दीजिए।
4.
यह ध्यान रखना आवश्यक है कि इन प्रश्नों के उत्तर देने के लिए तो ज्यादा हड़बड़ी दिखाएँ और ही अधिक देर लगाएँ। समय का ध्यान रखना आवश्यक है। (प्रयास कीजिए गद्यांश और पद्यांश के सभी भागों को आप आंधे घंटे में समाप्त कर सकें।)
5.
व्याकरण के उत्तर देने के लिए आपको व्याकरण के ज्ञान का होना आवश्यक है।
6.
सभी प्रश्न बहुविकल्पीय होते हैं। अतः अपने द्वारा रेखांकित उत्तर से इसका चयन संभालकर कीजिए।
7.
परीक्षा-पत्र में उस खण्ड के प्रश्नोत्तर पहले दें, जो आपको आते हों। कई बार हम उन्हें करने बैठ जाते हैं, जो हमें नहीं आते हैं। इसका नतीजा यह निकलता है कि हम बाकी भी नहीं कर पाते हैं।
8.
उत्तर-पत्रिका को गंदा नहीं करें। साफ-साफ अक्षरों में लिखें। बार-बार लिखकर उसे काटे नहीं। प्रयास करें कि एक ही बार में सही उत्तर लिख सकें।

काव्यांश में भी इन्हीं बातों पर अमल कीजिए। इस तरह से किया गया आपका यह भाग आपके अंकों को कहीं नहीं जाने देगा।

परीक्षा के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ

Meritnation परिवार



5 Comments Add your own

  • 1. amritesh  |  March 2nd, 2013 at 7:45 pm

    meritnation helps me a lot for preparation of exms.
    thanx

  • 2. Nayomi  |  March 3rd, 2013 at 12:55 pm

    Have a hindi exam day after tomm. !! HELP PLZZ!!

  • 3. Aman Singh  |  March 3rd, 2013 at 3:12 pm

    nico

  • 4. Parul  |  March 3rd, 2013 at 5:05 pm

    thanx………..
    meritnation

  • 5. ARUSHEE  |  March 4th, 2013 at 12:02 am

    thanks meritnation

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